सिंचित क्षेत्र विकास का उद्धेश्य इसके नाम से ही स्पष्ट हो जाता है। इस संगठन ने वर्ष 1974 में कार्य करना प्रारंभ किया, जिसका मुख्य कारण राजस्थान राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में निर्माणाधीन इंदिरा गांधी नहर परियोजना में उपलब्ध पानी, जो हिमाचल प्रदेश/पंजाब की व्यास व सतलुज नदी के राजस्थान को आवंटित हिस्से के अंतर्गत प्राप्त हो रहा था, का अधिकतम उपयोग कृषि कार्यों में करने का रहा है। इस संगठन ने न सिर्फ राष्ट्रीय उत्पादकता में अपना योगदान दिया बल्कि उत्तर-पश्चिमी राजस्थान की विस्तृत भू-भाग वाले क्षेत्र के विकास, जिसमें प्रत्येक काश्तकार के खेत तक पक्के खाले का निर्माण, स्वच्छ जल हेतु डिग्गियों का निर्माण, विभिन्न चक/गांवों को जोड़ने के लिए सड़कों का निर्माण, नहर/सड़क/खेतों की सुरक्षा हेतु वनीकरण, चारागाह विकास, मछली उत्पादन, कृषि अनुसंधान एवं विस्तार, काश्तकारों के आवास के लिए चक आबादी, काश्तकारों की फसल के विक्रय के उचित मूल्य के लिए कम से कम दूरी पर मंडियों का विकास तथा कुछ क्षेत्र में होने वाले जल प्लावन पर प्रभावी नियंत्रण जैसे दुरूह व जन उपयोगी कार्यों में योगदान दिया।  विस्तृत परिचय के लिये यहाँ क्लिक करें...